Study notes on "Geometry" For SSC CGL Tier-II 2017



प्रिय पाठकों,
हम आपके लिए लायें हैं "Study Notes based Preparation" इस अध्ययन में ज्यामिति की महत्वपूर्ण अवधारणाएं दी गयी हैं. हमने SSC-CGL मुख्य परीक्षा से यह विश्लेषण किया है कि ज्यामिति सेक्शन से पूछे जाने वाले प्रश्न सीधे तौर पर अवधारणाओं पर आधारित होते हैं.इस प्रकार की अवधारणाओं पर आधारित स्टडी नोट आज से दैनिक रूप से पोस्ट किए जायेंगे. प्रति दिन हम भिन्न विषयों पर स्टडी नोट उपलब्ध कराएंगे. हमारे साथ जुड़े रहें. 

नीचे दिया गया पाई चार्ट SSC CGL मुख्य परीक्षा में विशेष विषयों के वितरण के बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करता है.



बहुभुज और चतुर्भुज गुण

1.      बहुभुज: – यह तीन या तीन से अधिक सीढ़ी रेखाओं द्वारा निर्मित रेखा चित्र होता है।
 बहुभुज दो प्रकार के होते हैं।
उत्तल:     एक बहुभुज जिसमे उसके सभी आंतरिक कोण 180° से अधिक होते हैं
नतोदर:             एक बहुभुज जिसमे उसका कम से कम एक आंतरिक कोण 180° से अधिक होता है

       सामन्य बहुभुज: इसकी सभी भुजा समान होती हैं और सभी आंतरिक कोण भी समान होते हैं।
एक बहुभुज के आंतरिक कोणों का योग = (n – 2) × 180
 भुजाओं की संख्या

बाहरी कोणों की संख्या= 360


















2. आयात: –
  • दो समान अस्सन कोणों A और B के साथ एक समानांतर चतुर्भुज, एक आयात या वर्ग है।
  •  विकर्ण समान होते हैं और एक दुसरे को काटते हैं लेकिन आवश्यक नहीं की समकोण पर काटें।
  • आयात के दिए गए परिमाप के लिए, वर्ग का क्षेत्रफल अधिकतम होता है।
  • एक आयात की अस्सन भुजाओं के केंद्र बिंदु को जोड़ने पर बना कोण एक समचतुर्भुज है।
  • एक समानांतर चतुर्भुज कोणीय द्विभाजक के प्रतिछेदन को मध्य बिंदुओं को जोड़ने बार निर्मित होने वाला चतुर्भुज एक आयात है

3.    समचतुर्भुज: –
  •  एक समानांतर चतुर्भुज  जिसकी चारों भुजाएं समान होती है वह एक समचतुर्भुज होता है
  •  एक समचतुर्भुज के विकर्ण एक दुसरे को समकोण पर काटते हैं, लेकिन आवश्यक नही की वे समान हों।
  •  विकर्ण एक दुसरे को शीर्ष पर काटते हैं
  •   किन्ही दो अस्सन कोणों म योग 180° होता है
  •   एक समचतुर्भुज की अस्सन भुजाओं के मध्य बिंदुओं को मिलाने से निर्मित चित्र एक आयात है।

4.  समानांतर चतुर्भुज: –
  •  विपरीत भुजाएं एक दुसरे के समान होती हैं
  •   विपरीत कोण समान होते हैं
  •  किन्ही दो अस्सन कोणों का योग 180° होता है
  •   प्रत्येक विकर्ण समानांतर चतुर्भुज को दो अनुकूल त्रिभुजों में बाटता है
  •  एक वृत के अन्दर निर्मित समानांतर चतुर्भुज एक आयात है
  •  एक वृत के बाहर से बना हुए समानांतर चतुर्भुज एक समचतुर्भुज है।
5. समलंब: –
       एक चतुर्भुज जिसकी भुजाओं का केवल एक जोड़ा समानांतर है और दूसरा नहीं वह समलंब कहलाता है







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