SSC MTS Descriptive Paper TIER 2

प्रिय विद्यार्थियों,
सरकार की परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए हमें आयोग द्वारा आयोजित कराये जा रहे सभी टियर के लिए तैयार रहना होगा. SSC MTS टियर 1 और  SSC CGL टियर 1 समाप्त हो चुके हैं और सभी अब टियर 2 और टियर 3 के प्रतीक्षा में हैं. संक्षेप में, वर्णात्मक परीक्षा की तैयार शुरू कर दें जिसमें निबंध, पत्र या संक्षेपण लेखन होगा.वर्णनात्मक परीक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए, हम उम्मीदवारों को निबंध प्रदान कर रहे हैं ताकि उन्हें शब्दों के उचित उपयोग और एक महत्वपूर्ण विषय पर लेखन के बारे में पता लग सके.जिन लोगों को उचित मार्गदर्शन की ज़रूरत है और जो यह अवसर को खोना नहीं चाहते जिसका वह लम्बे समय से इंतजार कर रहे थे और वे इसके लिए समर्पित हैं वे यह लेख ध्यानपूर्वक पढ़ें. अड्डा 247 की ओर से सभी उम्मीदवारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!! 

बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध!!!

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना जनवरी 2015 में पानीपत में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक सरकारी योजना है. यह योजना विशेष रूप से हरियाणा में शुरू की गई थी क्योंकि इस देश में महिला लिंग अनुपात सबसे कम है (1000 पुरुषों में  877 महिलाएं). लड़कियों के स्तर में सुधार हेतु पूरे देश के सौ जिलों में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है. बालिका अनुपात कम होने के कारण 12 जिलों को हरियाणा राज्य से ही चुना गया था. यह कार्यक्रम भारतीय समाज में,  लड़कियों की स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव के लिए शुरू किया गया था. भारतीय समाज में बालिका जन्म  के लिए कई प्रतिबंध हैं जो बालिका जन्म के उचित विकास और संवृद्धि को बाधित करते हैं. इस योजना का लक्ष्य कन्या भ्रूण हत्या, बालिका असुरक्षा, लिंग भेदभाव और अन्य दुर्व्यवहारकारी कृत्यों का उन्मूलन करना है.

इस योजना के पीछे ध्यान धारक विचार आम लोगों के बीच जागरुकता में सुधार लाने और महिलाओं को दी जाने वाली कल्याण सेवाओं की दक्षता में सुधार करने में मदद करना है. हालांकि लिंग अनुपात 2011 जनगणना 2001 के आंकड़ों से ऊपर की ओर बढ़ रहा है. 2001 की जनगणना में पता चला है कि 2011 की जनगणना में 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 933 थी, जबकि 2011 की जनगणना में 1000 पुरुषों पर महिलाएं की संख्या 943 बढ़ीं, फिर भी कुछ राज्यों में उनकी गणना महिला लिंग अनुपात आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार की ज़रूरत है.   यदि लड़कियों के लिए इस तरह के मुद्दों को कम करने के लिए तत्काल आधार पर कुछ भी सही तरीके से लागू नहीं किया जाता है, तो निश्चित रूप से ऐसा एक दिन होगा, जब परिणाम भयावह हो जाएंगे और अनियंत्रित हो जाएगा, जिससे उथल-पुथल पैदा होगा. दुनिया में लड़कियों की आबादी लगभग आधी है इसलिए पृथ्वी पर उनका अस्तित्व भी अर्ध रूप से उत्तरदायी है.  भारतीय समाज की व्यापक  और दासोचित सोच यह है कि लड़कियां उनके माता-पिता के अलावा किसी और की संपत्ति हैं जिसे कर्मठता से बदलने की आवश्यकता है.

कुछ सकारात्मक पहलू हैं कि यह योजना बालिका शिशु के लिए सामाजिक मुद्दों को दूर करने के लिए एक महान शुरुआत के रूप में साबित होगी. हम आशा करते हैं कि ऐसा एक दिन अवश्य आएगा जब सामाजिक-आर्थिक कारणों से कोई भूर्ण हत्या,  बालिका अशिक्षितता, असुरक्षा, बलात्कार नहीं होगा. बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना, बालिका शिशु के प्रति मानवीय मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन प्राप्त करने का एक तरीका है. यह योजना लोगों को पुरूषों और बेटियों के बीच भेदभाव को खत्म करने और महिला भक्तभावों को खत्म करने की कुंजी के रूप में काम करने का आह्वान कर सकती है. महिलाओं का  सशक्तीकरण विशेष रूप से परिवार और समाज में सभी दौर की प्रगति लाती है और इस प्रकार राष्ट्र की प्रगति में भी मदद करती है. 

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